नरेंद्र मोदी सरकार ने दावा किया था कि साल 2022-23 तक किसानों को कृषि और गैर-कृषि श्रोतों से इतना लाभ होगा कि उनकी आमदनी दोगुनी हो जाएगी। दिल्ली के पूसा मेला ग्राउंड में किसान सम्मान सम्मेलन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें उन किसानों ने हिस्सा लिया जिन्होंने पिछले कुछ सालों में आधुनिक तकनीक, उन्नत प्रजाति के बीज और कैश क्रॉप की खेती के अलावा गैर-कृषि श्रोतों को अपनाकर सरकार की किसानों की आमदनी को दोगुना करने के दावे को सही ठहराया है। गाजीपुर के ऐसे 10 किसानों ने दिल्ली पूसा मैदान में आयोजित किसान सम्मान सम्मेलन कार्यक्रम में हिस्सा लियानई दिल्ली में आयोजित किसान सम्मान सम्मलेन में मुख्य अतिथि पीएम मोदी ने किसानों की बेहतरी से जुड़ी कई योजनाओं को शुरू करने का ऐलान किया। दिल्ली में आयोजित किसान सम्मान सम्मेलन में हिस्सा लेने वाली टीम में गाजीपुर के ओम प्रकाश भी शामिल थे। ओम प्रकाश सदर ब्लॉक के रौजा इलाके के रहने वाले हैं। साल 2017 में उनके हिस्से की पुश्तैनी 5 बीघे जमीन पर उगने वाली फसल से होने वाली आमदनी से असंतुष्ट होने के बाद दो गायों से डेयरी कारोबार में कदम रखाउस वक्त प्रतिदिन 10 लीटर दूध 2 गाय से निकलता था, जिसकी खपत घर और पास-पड़ोस तक ही सीमित रह जाती थी। कृषि विज्ञान केंद्र गाजीपुर के संपर्क में आने के बाद ओम प्रकाश ने इसको व्यवसाय के स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया। ओम प्रकाश ने कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से मिलकर डेयरी टेक्नोलॉजी की बारीकियों को समझने की कोशिश की। ओमप्रकाश ने बताया कि दूध को सीधे बेचने की बजाए अगर उसकी प्रोसेसिंग करके बेचा जाए तो दुग्ध उत्पादकों को ज्यादा मुनाफा हो सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से समय-समय पर आयोजित ट्रेनिंग कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर ओम प्रकाश ने दूध से मक्खन और घी बनाकर उनकी मार्केटिंग स्ट्रेटजी के बारे में जानकारी हासिल की। फिलहाल उनकी डेरी में 115 से 120 लीटर दूध प्रतिदिन होता है, जिससे उनकी ठीक-ठाक आमदनी हो जाती है। ओम प्रकाश बताते हैं कि सरकारी योजनाओं का उन्हें लाभ मिला है। योजनाओं का अगर सही समय पर प्रचार प्रसार होता रहे और किसान भी थोड़ी सजगता के साथ उसका लाभ लेते रहें तो वाकई किसान अपनी आमदनी में इजाफा करने में कामयाब होंगेइसके लिए उन्हें (किसानों) को पारंपरिक रबी और खरीफ की खेती से भी थोड़ा आगे बढ़कर प्रयोगधर्मी होने की आवश्यकता है। ओम प्रकाश ने बताया कि दिल्ली में आयोजित सम्मेलन के दौरान उन्हें डेयरी टेक्नोलॉजी से जुड़ी कई नई मशीनों के बारे में जानकारी मिली और साथ ही साथ कृषि के क्षेत्र में नए अनुसंधान के बारे में भी वहां बताया गया जो उनके लिए और उन जैसे किसानों के लिए काफी मददगार साबित होगा। किसानों की टीम में ही शामिल अर्जुन, सदर ब्लॉक के जलालपुर गांव के रहने वाले हैं। इनके हिस्से भी पांच बीघे ही उपजाऊ जमीन है। जिस पर वह हरी सब्जी,आलू धान गेहूं आदि उगाते थे। लेकिन खेती से होने वाली आमदनी से वह खुश नहीं थे। इसी दौरान किसी से इन्हें मुर्गी पालन के बारे में जानकारी मिली और यह भी जानकारी मिली कि गाजीपुर का कृषि विज्ञान केंद्र कृषकों को मुर्गी पालन निशुल्क ट्रेनिंग और मदद उपलब्ध करा रहा है। केवीके की मदद से किसान पोल्ट्री फार्मिंग में अपनी किस्मत आजमा सकते हैं|अर्जुन बताते हैं कि आज उनके पोल्ट्री फार्म में 1000 चूजे हैं। जब चूजे का 2 किलो वजन हो जाता है तो वह उन्हें बाजार में बेचने के लिए भेजते हैं, जिससे उन्हें एक लॉट में 25 से 40 हजार तक की आमदनी हो जाती है। साल भर में 6 से 7 लॉट वह अपने मुर्गी फार्म से निकालने में कामयाब रहते हैं। मुर्गियों को अगर कोई बीमारी होती है तो कृषि विज्ञान केंद्र के पशु चिकित्सक की सलाह से वह मुर्गियों को दवा देते हैं। अर्जुन बताते हैं कि कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से उन्हें शुरुआती दौर में निशुल्क चूजे भी उपलब्ध कराए गए थे।ऐसे में पोल्ट्री फार्मिंग उनके जीवन में गेमचेंजर की भूमिका अदा करने वाला कारोबार साबित हुआ है। अब उन्हें अच्छी खासी आमदनी होने लगी है। प्रगतिशील किसानों के लिए दिल्ली के कार्यक्रम के बारे में अर्जुन ने बताया कि उन्हें वहां नई नई कृषि आधारित तकनीक के बारे में जानने सीखने का अवसर मिला। वह खुश है कि उनका नाम भी अब प्रगतिशील किसानों की फेहरिस्त में शामिल है। एग्रीकल्चर साइंटिस्ट और केवीके के इंचार्ज डॉ विनोद सिंह ने बताया कि एग्रीकल्चर एक्सटेंशन में केवीके की महती भूमिका सदैव से रही है। किसानों को उन्नत प्रजाति के बीजों के बारे में बताना ,पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट की जानकारी देना और किस तरीके से कम संसाधन में ज्यादा पैदावार की जा सकती है।  इस बात पर केंद्रित ट्रेनिंग और परामर्श केवीके की ओर से दिया जाता है ।गाजीपुर में ऐसे बहुत से किसान है जो कि केवीके के संपर्क में आने के बाद अब ठीक-ठाक कमाई कर रहे हैं। या कहे तो उनकी पहले की तुलना में आमदनी दोगुनी या उससे ज्यादा हो गई है। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में महज 10 किसानों को ले जाने की अनुमति थी। ऐसे में केवीके ने 10 किसानों को चिन्हित कर ही ले जाने की योजना बनाई थी

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10 Replies to “खेती परंपरा से हटकर इन किसानों ने लिखी कामयाबी की कहानी, दोगुनी हुई आमदनी”

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